संजीव कुमार
विधानसभा चुनाव 2012 के परिणाम कई मामलों में भिन्न है। जनजागरण के बावजूद नव निर्वाचित 690 विधायकों में से 242 माननीय अपराधी छवि वाले और 457 करोड़पति विधायक विधानसभा पहुंच गए हैं। वहीं मणिपुर देश का इकलौता राज्य है जिसके सभी 60 विधायक बेदाग हैं। इस तरह मणिपुर पूरे देश के सामने एक नजीर पेश करता है
विधानसभा चुनाव 2012 के परिणाम आ चुके हैं। सभी पांचों राज्यों में सरकार बन चुकी है। और सदन में सभी नव निर्वाचित विधायक सूबे और जनता की सेवा का शपथ ले चुके हैं। सूबे और जनता की कितनी सेवा करेंगे यह तो आगामी पांच सालों में पता चलेगा। क्योंकि अब यही नव निर्वाचित माननीय अगले पांच सालों तक अपने सूबे में जनता के भाग्य का फैसला करेंगे। गत वर्ष भ्रष्टाचार के खिलाफ जनजागरण का जो बिगुल बजा था। उस बिगुल का कितना असर हुआ? अन्ना टीम और बाबा रामदेव सहित कई प्रमुख संगठनों व लोगों ने इस जनजागरण यज्ञ में अपने हिसाब से जो आहुति दी। इस जनजागरण से लोगों ने कितना सीखा और कितना अपने जीवन में उतारा। अब इसके आकलन का समय है। क्योंकि बीते एक महीने में जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं उन राज्यों की जनता के लिए यह सोचने-विचारने और कुछ करने का समय था। अब उनने क्या किया इस पर बात करने का मौका है। जिन पांचों राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं, वे हैं- उत्तराखंड (70), उत्तर प्रदेश (403), पंजाब (117), गोवा (40) और मणिपुर (60)। इन पांचों राज्यों में कुल 690 माननीय चुने गए हैं। एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच ने इन सभी नव निर्वाचित विधायकों के हलफनामों का विश्लेषण किया है, जो इन लोगों ने अपना पर्चा दाखिल करते समय चुनाव आयोग को दिए थे। विश्लेषण के अनुसार, नव निर्वाचित 690 विधायकों में से 242 विधायकों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले होने की बात स्वीकार की है। कहने का तात्पर्य यह है कि नव निर्वाचित विधायकों में 35 प्रतिशत विधायक ऐसे हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। वहीं 690 माननीय विधायकों में से 114 विधायक ऐसे हैं जिनके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और बलात्कार जैसे गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं।
आपराधिक मामलों वाले विधायकों के मामले में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है। उत्तर प्रदेश के 403 नव निर्वाचित विधायकों में से 189 विधायकों (47 प्रतिशत) के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। वहीं 98 विधायक (24 प्रतिशत) ऐसे हैं जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले चले रहे हैं। इस मामले में गोवा का स्थान दूसरा है। गोवा के 40 नव निर्वाचित विधायकों में से 12 विधायकों (30 प्रतिशत) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले लंबित होने की बात स्वीकार की है। वहीं 3 विधायक (8 प्रतिशत) ऐसे हैं जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं। इस मामले में उत्तराखंड तीसरे नंबर पर है। जहां 70 नव निर्वाचित विधायकों में से 19 विधायकों (27 प्रतिशत) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले होने की बात चुनाव आयोग को बताई है। वहीं 5 विधायक ऐसे हैं जिन्होंने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले लंबित होने की बात की है। इस मामले में चौथे नंबर पर पंजाब है। जहां 117 नव निर्वाचित विधायकों में से 22 विधायकों (19 प्रतिशत) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले होने की बात चुनाव आयोग को बताई है। वहीं 8 विधायक (7 प्रतिशत) ऐसे हैं जिनके खिलाफ हत्या, बलात्कार, फिरौती जैसे गंभीर आपराधिक मामले लंबित है।
वहीं दूसरी तरफ मणिपुर एक ऐसा राज्य है जिसने सभी राज्यों के राजनीतिक दलों और जनता के लिए एक नजीर पेश किया है। इन पांच राज्यों में मणिपुर इकलौता ऐसा राज्य है जिसके सभी 60 विधायक बेदाग हैं। कहने का अर्थ यह है कि मणिपुर के नव निर्वाचित विधायकों में से एक भी विधायक ऐसा नहीं है जिस पर कोई आपराधिक मामला दर्ज हो। कहने की आवश्यकता नहीं है कि मणिपुर का चुनाव परिणाम यह बताता है कि हौसला और जज्बा हो तो कुछ भी संभव है। जनता अगर चाह ले तो अपराधी और भ्रष्टाचारी को सदन के बाहर बिठा सकती है। मणिपुर की जनता ने यह करके दिखाया है। यह निश्चय ही संतोष जनक है। मणिपुर के अलावा अन्य राज्यों में अभी और जनजागरण की आवश्यकता है। क्योंकि अन्य राज्यों से कुछ ऐसे अपराधी छवि के विधायक चुनकर आ गए हैं जिन्हें चुनकर नहीं आना चाहिए था। ऐसे में हमें मणिपुर से सीख लेते हुए और बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए।
आधे से अधिक हैं करोड़पति विधायक
जहां तक करोड़पति विधायकों की बात है तो पांचों राज्यों के 690 नव निर्वाचित विधायकों में से 457 विधायक करोड़पति हैं। कहने का अर्थ यह है कि नव निर्वाचित विधायकों में से 66 प्रतिशत विधायक ऐसे हैं जिन्होंने चुनाव आयोग को दिए अपने हलफनामे अपने को करोड़पति बताया है। इस मामले में गोवा शीर्ष पर है। गोवा के 40 में से 37 नव निर्वाचित (93 प्रतिशत) विधायक करोड़पति हैं। पंजाब इस मामले में दूसरे नंबर पर है। पंजाब के 117 में से 101 नव निर्वाचित (86 प्रतिशत) विधायकों ने अपने आप को करोड़पति बताया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश तीसरे नंबर पर है। उत्तर प्रदेश के 403 में से 271 नव निर्वाचित (67 प्रतिशत) विधायक करोड़ति हैं। चौथे नंबर पर उत्तराखंड है। उत्तराखंड के 70 में से 32 नव निर्वाचित (67 प्रतिशत) विधायकों ने अपने को करोड़पति बताया है। करोड़पति विधायकों के मामले में मणिपुर पांचवें नंबर है। मणिपुर के 60 में से 16 विधायक करोड़पति हैं। कहने अर्थ यह है कि मणिपुर के 27 प्रतिशत विधायक ऐसे हैं जिन्होंने अपने आप को करोड़पति घोषित किया है।
हाशिए पर महिलाएं
हम एक तरफ महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं लेकिन जब महिला को सशक्त बनाने की बात आती है तो इस पर ध्यान नहीं देते हैं। बीते पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम से भी यह बात सिद्ध होती है। क्योंकि इन राज्यों में कोई भी ऐसा राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल नहीं है जिसने आधी आबादी कही जाने वाली महिला को विधानसभा चुनाव 2012 में वाजिब उम्मीदवारी दी हो। अब चुनाव परिणाम को देखें तो पांच राज्यों के कुल 690 विधायकों में नव निर्वाचित महिला विधायकों की संख्या मात्र 55 है जबकि पुरुष विधायकों की संख्या 635 है। कहने का अर्थ यह है कि इस बार मात्र 8 प्रतिशत महिलाएं निर्वाचित होकर विधानसभा में पहुंची हैं। 2007 में महिलाओं का यह प्रतिनिधित्व 5 प्रतिशत ही था जब 37 महिलाएं विधानसभा पहुंची थीं। हालांकि इस चुनाव में महिलाओं के प्रतिनिधित्व में 3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। आधी आबादी के हिसाब से यह वृद्धि अपेक्षाकृत बहुत ही कम है। वह भी ऐसे समय में जब दो प्रमुख दलों की मुखिया महिला ही हैं।
पांच राज्यों में महिला प्रतिनिधित्व
राज्य विधायक पुरुष विधायक महिला विधायक
उत्तराखंड 70 65 5
उत्तर प्रदेश 403 371 32
गोवा 40 39 1
पंजाब 117 103 14
मणिपुर 60 57 3
लंबित अपराधिक मामलों वाले विधायक
राज्य कुल विधायक आ.मा. वाले विधायक गंभीर आपराधिक मामले वाले विधायक
उत्तराखंड 70 19 5
उत्तर प्रदेश 403 189 98
गोवा 40 12 3
पंजाब 117 22 8
मणिपुर 60 0 0
लंबित गंभीर आपराधिक मामलों वाले विधायक
(राज्यवार)
उत्तराखंड
क्र. विधायक क्षेत्र पार्टी गंभीर मामले कुल आपराधिक मामले
1. अरविंद पांडे गदरपुर भाजपा 1 3
2. दिनेश अग्रवाल धरमपुर कांग्रेस 2 2
3. प्रीतम सिंह चक्रटा कांग्रेस 1 2
उत्तर प्रदेश
1. मित्रसेन बिकापुर सपा 26 36
2. सुशील सिंह सकलधीरा निर्दल 16 20
3. रामवीर सिंह जसराना सपा 11 18
गोवा
1. जीवियर पेेस्को न्यूवेम जीवीपी 2 10
2. अतानासियो मॉनसेरेट सेंट क्रूज कांग्रेस 3 2
3. जेनिफर मॉनसेरेट टेलीगाव कांग्रेस 3 1
पंजाब
1. बीबी जागीर कौर भोलाथ शि.अ.द. 3 1
2. बलबीर सिद्धू एसएएस नगर कांग्रेस 2 1
3. सिमरजीत सिंह बैंस अतम नगर निर्दल 3 6
करोड़पति विधायक
राज्य कुल विधायक करोड़पति विधायक प्रतिशत
उत्तराखंड 70 32 46
उत्तर प्रदेश 403 271 67
गोवा 40 37 93
पंजाब 117 101 86
मणिपुर 60 16 27
कुल 690 457 66
शीर्ष तीन करोड़पति विधायक (राज्यवार)
उत्तराखंड
विधायक क्षेत्र पार्टी कुल संपत्ति
राजेश शुक्ला किछा भाजपा 26.63 करोड़
अमृता रावत रामनगर कांग्रेस 13.57 करोड़
सुरेंद्र सिंह जीना साल्ट भाजपा 7.04 करोड़
उत्तर प्रदेश
काजिम अली खान स्वार कांग्रेस 56.89 करोड़
शाह आलम मुबारकपुर बसपा 54.44 करोड़
महेश कुमार शर्मा नोएडा भाजपा 37.45 करोड़
गोवा
प्रतापसिंह राणे पोरियम कांग्रेस 25.87 करोड़
विजय सरदेसाई फटोरडा निर्दल 25.21 करोड़
जेनिफर मॉनसेरेटो टेलीगाव कांग्रेस 23.07 करोड़
पंजाब
करण कौर मुक्तसर कांग्रेस 128.43 करोड़
सुखबीर सिंह कौर जलालाबाद शि.अ.द. 90.86 करोड़
केवल सिंह ढिल्लन बरनाला कांग्रेस 78.51 करोड़
विधानसभा चुनाव 2012 के परिणाम कई मामलों में भिन्न है। जनजागरण के बावजूद नव निर्वाचित 690 विधायकों में से 242 माननीय अपराधी छवि वाले और 457 करोड़पति विधायक विधानसभा पहुंच गए हैं। वहीं मणिपुर देश का इकलौता राज्य है जिसके सभी 60 विधायक बेदाग हैं। इस तरह मणिपुर पूरे देश के सामने एक नजीर पेश करता है
विधानसभा चुनाव 2012 के परिणाम आ चुके हैं। सभी पांचों राज्यों में सरकार बन चुकी है। और सदन में सभी नव निर्वाचित विधायक सूबे और जनता की सेवा का शपथ ले चुके हैं। सूबे और जनता की कितनी सेवा करेंगे यह तो आगामी पांच सालों में पता चलेगा। क्योंकि अब यही नव निर्वाचित माननीय अगले पांच सालों तक अपने सूबे में जनता के भाग्य का फैसला करेंगे। गत वर्ष भ्रष्टाचार के खिलाफ जनजागरण का जो बिगुल बजा था। उस बिगुल का कितना असर हुआ? अन्ना टीम और बाबा रामदेव सहित कई प्रमुख संगठनों व लोगों ने इस जनजागरण यज्ञ में अपने हिसाब से जो आहुति दी। इस जनजागरण से लोगों ने कितना सीखा और कितना अपने जीवन में उतारा। अब इसके आकलन का समय है। क्योंकि बीते एक महीने में जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं उन राज्यों की जनता के लिए यह सोचने-विचारने और कुछ करने का समय था। अब उनने क्या किया इस पर बात करने का मौका है। जिन पांचों राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं, वे हैं- उत्तराखंड (70), उत्तर प्रदेश (403), पंजाब (117), गोवा (40) और मणिपुर (60)। इन पांचों राज्यों में कुल 690 माननीय चुने गए हैं। एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच ने इन सभी नव निर्वाचित विधायकों के हलफनामों का विश्लेषण किया है, जो इन लोगों ने अपना पर्चा दाखिल करते समय चुनाव आयोग को दिए थे। विश्लेषण के अनुसार, नव निर्वाचित 690 विधायकों में से 242 विधायकों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले होने की बात स्वीकार की है। कहने का तात्पर्य यह है कि नव निर्वाचित विधायकों में 35 प्रतिशत विधायक ऐसे हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। वहीं 690 माननीय विधायकों में से 114 विधायक ऐसे हैं जिनके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और बलात्कार जैसे गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं।
आपराधिक मामलों वाले विधायकों के मामले में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है। उत्तर प्रदेश के 403 नव निर्वाचित विधायकों में से 189 विधायकों (47 प्रतिशत) के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। वहीं 98 विधायक (24 प्रतिशत) ऐसे हैं जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले चले रहे हैं। इस मामले में गोवा का स्थान दूसरा है। गोवा के 40 नव निर्वाचित विधायकों में से 12 विधायकों (30 प्रतिशत) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले लंबित होने की बात स्वीकार की है। वहीं 3 विधायक (8 प्रतिशत) ऐसे हैं जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं। इस मामले में उत्तराखंड तीसरे नंबर पर है। जहां 70 नव निर्वाचित विधायकों में से 19 विधायकों (27 प्रतिशत) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले होने की बात चुनाव आयोग को बताई है। वहीं 5 विधायक ऐसे हैं जिन्होंने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले लंबित होने की बात की है। इस मामले में चौथे नंबर पर पंजाब है। जहां 117 नव निर्वाचित विधायकों में से 22 विधायकों (19 प्रतिशत) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले होने की बात चुनाव आयोग को बताई है। वहीं 8 विधायक (7 प्रतिशत) ऐसे हैं जिनके खिलाफ हत्या, बलात्कार, फिरौती जैसे गंभीर आपराधिक मामले लंबित है।
वहीं दूसरी तरफ मणिपुर एक ऐसा राज्य है जिसने सभी राज्यों के राजनीतिक दलों और जनता के लिए एक नजीर पेश किया है। इन पांच राज्यों में मणिपुर इकलौता ऐसा राज्य है जिसके सभी 60 विधायक बेदाग हैं। कहने का अर्थ यह है कि मणिपुर के नव निर्वाचित विधायकों में से एक भी विधायक ऐसा नहीं है जिस पर कोई आपराधिक मामला दर्ज हो। कहने की आवश्यकता नहीं है कि मणिपुर का चुनाव परिणाम यह बताता है कि हौसला और जज्बा हो तो कुछ भी संभव है। जनता अगर चाह ले तो अपराधी और भ्रष्टाचारी को सदन के बाहर बिठा सकती है। मणिपुर की जनता ने यह करके दिखाया है। यह निश्चय ही संतोष जनक है। मणिपुर के अलावा अन्य राज्यों में अभी और जनजागरण की आवश्यकता है। क्योंकि अन्य राज्यों से कुछ ऐसे अपराधी छवि के विधायक चुनकर आ गए हैं जिन्हें चुनकर नहीं आना चाहिए था। ऐसे में हमें मणिपुर से सीख लेते हुए और बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए।
आधे से अधिक हैं करोड़पति विधायक
जहां तक करोड़पति विधायकों की बात है तो पांचों राज्यों के 690 नव निर्वाचित विधायकों में से 457 विधायक करोड़पति हैं। कहने का अर्थ यह है कि नव निर्वाचित विधायकों में से 66 प्रतिशत विधायक ऐसे हैं जिन्होंने चुनाव आयोग को दिए अपने हलफनामे अपने को करोड़पति बताया है। इस मामले में गोवा शीर्ष पर है। गोवा के 40 में से 37 नव निर्वाचित (93 प्रतिशत) विधायक करोड़पति हैं। पंजाब इस मामले में दूसरे नंबर पर है। पंजाब के 117 में से 101 नव निर्वाचित (86 प्रतिशत) विधायकों ने अपने आप को करोड़पति बताया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश तीसरे नंबर पर है। उत्तर प्रदेश के 403 में से 271 नव निर्वाचित (67 प्रतिशत) विधायक करोड़ति हैं। चौथे नंबर पर उत्तराखंड है। उत्तराखंड के 70 में से 32 नव निर्वाचित (67 प्रतिशत) विधायकों ने अपने को करोड़पति बताया है। करोड़पति विधायकों के मामले में मणिपुर पांचवें नंबर है। मणिपुर के 60 में से 16 विधायक करोड़पति हैं। कहने अर्थ यह है कि मणिपुर के 27 प्रतिशत विधायक ऐसे हैं जिन्होंने अपने आप को करोड़पति घोषित किया है।
हाशिए पर महिलाएं
हम एक तरफ महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं लेकिन जब महिला को सशक्त बनाने की बात आती है तो इस पर ध्यान नहीं देते हैं। बीते पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम से भी यह बात सिद्ध होती है। क्योंकि इन राज्यों में कोई भी ऐसा राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल नहीं है जिसने आधी आबादी कही जाने वाली महिला को विधानसभा चुनाव 2012 में वाजिब उम्मीदवारी दी हो। अब चुनाव परिणाम को देखें तो पांच राज्यों के कुल 690 विधायकों में नव निर्वाचित महिला विधायकों की संख्या मात्र 55 है जबकि पुरुष विधायकों की संख्या 635 है। कहने का अर्थ यह है कि इस बार मात्र 8 प्रतिशत महिलाएं निर्वाचित होकर विधानसभा में पहुंची हैं। 2007 में महिलाओं का यह प्रतिनिधित्व 5 प्रतिशत ही था जब 37 महिलाएं विधानसभा पहुंची थीं। हालांकि इस चुनाव में महिलाओं के प्रतिनिधित्व में 3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। आधी आबादी के हिसाब से यह वृद्धि अपेक्षाकृत बहुत ही कम है। वह भी ऐसे समय में जब दो प्रमुख दलों की मुखिया महिला ही हैं।
पांच राज्यों में महिला प्रतिनिधित्व
राज्य विधायक पुरुष विधायक महिला विधायक
उत्तराखंड 70 65 5
उत्तर प्रदेश 403 371 32
गोवा 40 39 1
पंजाब 117 103 14
मणिपुर 60 57 3
लंबित अपराधिक मामलों वाले विधायक
राज्य कुल विधायक आ.मा. वाले विधायक गंभीर आपराधिक मामले वाले विधायक
उत्तराखंड 70 19 5
उत्तर प्रदेश 403 189 98
गोवा 40 12 3
पंजाब 117 22 8
मणिपुर 60 0 0
लंबित गंभीर आपराधिक मामलों वाले विधायक
(राज्यवार)
उत्तराखंड
क्र. विधायक क्षेत्र पार्टी गंभीर मामले कुल आपराधिक मामले
1. अरविंद पांडे गदरपुर भाजपा 1 3
2. दिनेश अग्रवाल धरमपुर कांग्रेस 2 2
3. प्रीतम सिंह चक्रटा कांग्रेस 1 2
उत्तर प्रदेश
1. मित्रसेन बिकापुर सपा 26 36
2. सुशील सिंह सकलधीरा निर्दल 16 20
3. रामवीर सिंह जसराना सपा 11 18
गोवा
1. जीवियर पेेस्को न्यूवेम जीवीपी 2 10
2. अतानासियो मॉनसेरेट सेंट क्रूज कांग्रेस 3 2
3. जेनिफर मॉनसेरेट टेलीगाव कांग्रेस 3 1
पंजाब
1. बीबी जागीर कौर भोलाथ शि.अ.द. 3 1
2. बलबीर सिद्धू एसएएस नगर कांग्रेस 2 1
3. सिमरजीत सिंह बैंस अतम नगर निर्दल 3 6
करोड़पति विधायक
राज्य कुल विधायक करोड़पति विधायक प्रतिशत
उत्तराखंड 70 32 46
उत्तर प्रदेश 403 271 67
गोवा 40 37 93
पंजाब 117 101 86
मणिपुर 60 16 27
कुल 690 457 66
शीर्ष तीन करोड़पति विधायक (राज्यवार)
उत्तराखंड
विधायक क्षेत्र पार्टी कुल संपत्ति
राजेश शुक्ला किछा भाजपा 26.63 करोड़
अमृता रावत रामनगर कांग्रेस 13.57 करोड़
सुरेंद्र सिंह जीना साल्ट भाजपा 7.04 करोड़
उत्तर प्रदेश
काजिम अली खान स्वार कांग्रेस 56.89 करोड़
शाह आलम मुबारकपुर बसपा 54.44 करोड़
महेश कुमार शर्मा नोएडा भाजपा 37.45 करोड़
गोवा
प्रतापसिंह राणे पोरियम कांग्रेस 25.87 करोड़
विजय सरदेसाई फटोरडा निर्दल 25.21 करोड़
जेनिफर मॉनसेरेटो टेलीगाव कांग्रेस 23.07 करोड़
पंजाब
करण कौर मुक्तसर कांग्रेस 128.43 करोड़
सुखबीर सिंह कौर जलालाबाद शि.अ.द. 90.86 करोड़
केवल सिंह ढिल्लन बरनाला कांग्रेस 78.51 करोड़
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