को बड़-छोट कहत अपराधू ?
संजीव कुमार
दिल्ली चुनाव में उतरे प्रत्याशियों में कौन बड़ा है और कौन छोटा, यह निर्णय करना मुश्किल हो रहा है। छोटी-बड़ी सभी पार्टियों के उम्मीदवारों में से कोई किसी से कम नहीं है। चाहे वह संपत्ति का मामला हो या आपराधिक रिकॉर्ड का।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बार 863 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। 2008 के चुनाव में 69 पार्टियां चुनाव लड़ रही हैं जबकि 2003 में 62 पार्टियां चुनाव मैदान में थीं। साफ है कि राजनीतिक विघटन बढ़ा है। नई दिल्ली विधानसभा सीट से इस बार सबसे अधिक 25 प्रत्याशी हैं। यह समझना होगा कि इनमें उधार के उम्मीदवार भी हैं, जिन्हें बड़ी पार्टियों ने अपने फायदे के लिए अनेक छोटी पार्टियों से डमी उम्मीदवार के रूप में खड़ा किया है। गौरतलब है कि यहां से दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और भाजपा के विजय जौली आमने-सामने हैं। सबसे कम तीन प्रत्याशी घोंडा विधानसभा सीट से हैं और पांच प्रत्याशी ब्रिजवासन विधानसभा से हैं। कुल 69 पार्टियों में से 41 पार्टियां, 3 या उससे कम सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। इस चुनाव में ऐसी 23 पार्टियां हैं जो सिर्फ एक सीट पर चुनाव मैदान में हैं।
दिल्ली चुनाव में उतरे प्रत्याशियों में कौन बड़ा है और कौन छोटा, यह निर्णय करना मुश्किल हो रहा है। छोटी-बड़ी सभी पार्टियों के उम्मीदवारों में से कोई किसी से कम नहीं है। चाहे वह संपत्ति का मामला हो या आपराधिक रिकॉर्ड का। दिल्ली चुनाव के 863 उम्मीदवारों में से 645 उम्मीदवारों के हलफनामों पर 'दिल्ली इलेक्शन वाच' संस्था द्वारा अधययन किया गया। इस अधययन के बाद पता चला कि 153 ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन्होंने अपनी कुल संपत्ति एक करोड़ रुपये से ऊपर बताई है। इनमें से 41 कांग्रेस पार्टी, 47 भाजपा और 32 उम्मीदवार बसपा के हैं। आंकड़े के आधार पर यह कहा जा सकता है कि कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार भाजपा के उम्मीदवारों से अधिक चालाक बनते हुए उनसे कम संपत्ति दिखाया है। लेकिन विडंबना यह है कि इनमें से अधिकतर करोड़पतियों ने अपना पैन नंबर नहीं दिया है। पैन नंबर न देने वालों में भाजपा के जीतेंद्र सिंह शंटी, कांग्रेस की अंजली राय और बीएसपी के राम सिंह नेताजी प्रमुख हैं।
यहां यह प्रश्न उठता है कि क्या इन उम्मीदवारों ने अपनी संपत्ति का सही ब्योरा दिया है या सिर्फ कागजी खानापूर्ति की है। क्योंकि इन लोगों ने जो अपने मकान और जमीन का मूल्य लगाया है वह बाजार मूल्य का आधा ही प्रतीत होता है। अधिकतर उम्मीदवारों ने अपनी संपत्ति का आधा-अधूरा ही ब्योरा दिया है। ऐसे में इस हलफनामे का क्या औचित्य रह जाता है? इतना ही नहीं, इन उम्मीदवारों में 21 ऐसे हैं जिन्होंने अपने हलफनामे में बताया है कि उनके पास किसी प्रकार का कोई वाहन नहीं है। इनमें 6 उम्मीदवार ऐसे हैं जिन्होंने अपनी कुल संपत्ति 90 लाख से ऊपर बताई है। हलफनामे के अनुसार, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और भाजपा विधायक ओ.पी. बब्बर के पास अपना कोई वाहन नहीं है। अगर इन विधायकों के पास अपना वाहन नहीं है, तो क्या ये लोग पैदल ही सत्ता के गलियारे का चक्कर लगाते हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने पिछले पांच साल में 74 लाख, 12 हजार, 458 रुपये की संपत्ति अर्जित की है और ओ.पी बब्बर ने 81 लाख, 88 हजार, 334 रुपये की संपत्ति बनाई है।
पांच सबसे बड़े धन-कुबेर
सीट उम्मीदवार का नाम कुल संपत्ति
महरौली वेदप्रकाश (बसपा) 2,170,599,550
छतरपुर कंवर सिंह तंवर (बसपा) 1,570,818,348
आरकेपुरम सूरजभान (राजअपा) 500,070,000
महरौली शेर सिंह डागर (भाजपा) 465,266,481
जंगपुरा मनजिंदर सिंह सिरसा(भाजपा)437,033,791
इस चुनाव में 12 ऐसे उम्मीदवार हैं, जिनके पास शून्य नकद राशि और शून्य जमा राशि है। इस सूची में एक उम्मीदवार से हैं जिनकी कुल संपत्तिा का मूल्य 4 करोड़ से ऊपर है। गैरतलब है कि छतरपुर सीट से राष्ट्रीय लोकदल के प्रत्याशी प्रेमराज की कुल संपत्तिा का मूल्य 45,96,00 रुपये है, लेकिन इनकी जमा और नकद राशि शून्य है। क्या यह विश्वास करने के लायक है कि किसी के पास 4 करोड़ से ऊपर की संपत्तिा हो और उनके पास जमा और नकद राशि शून्य हो। इनमें पांच उम्मीदवार ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपनी कुल संपत्तिा शून्य बताई है। कहने का अर्थ यह है कि उनके पास चल-अचल संपत्तिा कुछ भी नहीं है, फिर चुनाव किस बूते पर लड़ने चले हैं।
2008 दिल्ली विधानसभा चुनाव में 45 ऐसे वर्तमान विधायक हैं जो फिर से चुनाव मैदान में हैं। 2003 और 2008 में दिए अपने हलफनामे में इन विधायकों में से अधिकतर ने अपनी संपत्तिायों में भारी वृध्दि दिखाई है। यह वृध्दि प्रति विधायक औसतन 211 प्रतिशत या 1.8 करोड़ रुपये प्रति विधायक है। क्या इन विधायकों से यह नहीं पूछा जाना चाहिए कि पिछले 5 वर्षों में आपने लगभग 2 करोड़ की संपत्तिा कैसे बनाई कहां से आया यह धन पशु क्या वेतन और भत्तो से इतना पैसा बच जाता है कि पांच वर्षों में दो करोड़ रुपये से अधिाक की संपत्तिा बनाई जा सके।
पांच वर्षों में बनाई सबसे अधिक संपत्ति
सीट - उम्मीदवार का नाम - वृध्दि प्रतिशत में
दिल्ली कैंट-अशोक अहूजा (कांग्रेस) -1312 प्रतिशत
पटपड़गंज - मदन सिंह (बसपा) -1237 प्रतिशत
आरकेपुरम- बरखा सिंह (कांग्रेस) -1002 प्रतिशत
तिमारपुर- सुरिंदर पाल सिंह(कांग्रेस) - 972 प्रतिशत
चांदनी चौक-प्रहलाद सिंह साहनी(कांग्रेस)-662 प्रतिशत
पालम - धर्मदेव सोलंकी (भाजपा) - 548 प्रतिशत
तिलक नगर- ओ.पी. बब्बर (भाजपा) -502 प्रतिशत
बल्लीमारान- हारून यूसुफ (कांग्रेस) -482 प्रतिशत
हरिनगर - हरशरण सिंह बल्ली (भाजपा)-456 प्रतिशत
करोल बाग- सुरेंद्रर पाल रतवाल (भाजपा)-438 प्रतिशत
इस चुनाव में अनेक ऐसे उम्मीदवार हैं जिन्होंने अपने हलफनामे में पैन कार्ड नं. का उल्लेख नहीं किया है, जबकि हलफनामे में पैन कार्ड के लिए अलग से जगह दी गई थी। पैन कार्ड नंबर न देने वालों में बसपा के, भाजपा के, कांग्रेस के 7 और अन्य 16 उम्मीदवार शामिल हैं। इनमें से कई उम्मीदवारों की संपत्तिा 1 करोड़ रुपये से अधिाक है।
ये तो हुई उम्मीदवारों की संपत्तिा की बात। अब उनके क्रिमिनल रिकॉर्ड की बात करते हैं। इस बार दिल्ली विधानसभा में 91 ऐसे प्रत्याशी हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से कुछ प्रमुख पार्टियों से भी आते हैं। गौरतलब है कि दिल्ली विधान सभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के 19-19 ऐसे प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जिनके खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास और अपहरण के मामले लंबित चल रहे हैं। यही नहीं आंकड़ों पर नजर डालें तो चुनाव लड़ रहे कुल 863 प्रत्याशियों में से 91 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें भाजपा के एक प्रत्याशी सहित अन्य तीन के खिलाफ हत्या जैसे गंभीर आरोप के केस चल रहे हैं।
हत्या जैसे संगीन अपराधा के आरोपी प्रत्याशियों में नरेला से लोजपा के उम्मीदवार अमित कुमार, अंबेडकर नगर से भाजपा उम्मीदवार सुरेश चंद और सीलमपुर से बसपा प्रत्याशी हाजी अफजल शामिल हैं। संस्था की रिपोर्ट के अनुसार हाजी अफजल का रिकार्ड अपने आप में चौंकाने वाला है। उसके खिलाफ हत्या के 20 मामले दर्ज हैं। संस्था ने 875 प्रत्याशियों में से 645 प्रत्याशियों के हलफनामें की जांच की है। इसके अलावा अन्य 20 प्रत्याशियों पर हत्या, अपहरण और फिरौती जैसे संगीन आरोप हैं।
मंगलवार, 2 दिसंबर 2008
दिल्ली चुनाव : संपत्ति का मामला हो या अपराधिक रिकॉर्ड का।
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