शनिवार, 20 दिसंबर 2008

दिल्ली विधानसभा चुनाव का परिणाम

दिल्ली के दिल में शीला ही
संजीव कुमार
मतदाताओं ने विकास के मुद्दे पर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस को लगातार तीसरी बार राजधानी दिल्ली की सत्ताा सौंप दी है। यह परिणाम सारे चुनावी सर्वेक्षणों और मीडिया विश्लेषकों को मुंह चिढ़ाता प्रतीत हो रहा है
दिल्ली विधानसभा चुनाव का परिणाम पूरी तरह चौंकाने वाला है। यह परिणाम सारे चुनावी सर्वेक्षणों और मीडिया विश्लेषकों को मुंह चिढ़ाता प्रतीत हो रहा है। दिल्ली चुनाव में मतदाताओं ने विकास के मुद्दे पर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस को लगातार तीसरी बार राजधानी दिल्ली की सत्ताा सौंप दी है। भाजपा के आतंकवाद और महंगाई के मुद्दे को यहां की जनता ने सिरे से नकारते हुए विधानसभा की 69 सींटों में से 42 सीटों पर विजय दिलाई, जबकि भाजपा को सिर्फ 23 सीटों से संतोष करना पड़ा। वैसे 2003 के विधानसभा चुनाव से इस चुनाव की तुलना करें तो पाते हैं कि कांग्रेस को 5 सीटों की हानि और भाजपा को 3 सीटों का लाभ हुआ है। गौरतलब है कि 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 47 और भाजपा को 20 सीटें मिली थीं। इस चुनाव में बसपा को 2 और अन्य को 2 सीटें मिली हैं। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सहित उनके मंत्रिमंडल के सभी सदस्य डॉ. ए.के. वालिया, अरविंदर सिंह लवली, मंगतराम सिंघल, योगानंद शास्त्री, हारून यूसुफ और राजकुमार चौहान भारी मतों से विजयी हुए हैं। इनके अलावा पार्टी के तीनों प्रदेश अधयक्ष चौ. प्रेम सिंह, सुभाष चोपड़ा और रामबाबू शर्मा चुनाव जीतने वालों में प्रमुख हैं।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में पूरी तैयारी से आई मायावती की पार्टी बसपा को बदरपुर और गोकुलपुरी की सीट मिली है, जहां से क्रमश: रामसिंह नेताजी और सुरेंद्र कुमार विजयी हुए हैं। मटिया महल सीट रामविलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी को मिली है, तो नजफगढ़ में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने जीत हासिल की है। यहां से क्रमश: शोएब इकबाल और भरत सिंह विजयी हुए हैं। इतना ही नहीं, दिल्ली में बसपा 2 सीटें जीतने के साथ पांच सीटों पर नंबर दो पर रही है तो लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ओखला विधानसभा सीट पर दूसरे नंबर पर रही है। इस प्रकार क्षेत्रीय पार्टियों ने इस चुनाव में राजधानी दिल्ली में भी अपनी उपस्थिति का अहसास कराया है। दूसरी तरफ जनता ने भी दोनों प्रमुख दलों को यह अहसास कराया है कि आप लोग विकास की राजनीति करें, अन्यथा जनता का आपको समर्थन नहीं मिलेगा।
अगर कांग्रेस की सीटों का आकलन करें तो पाते हैं कि इस चुनाव में कांग्रेस का दिल्ली के सभी क्षेत्रों में समान रूप से दबदबा कायम रहा है। विश्लेषण के खयाल से पूरी दिल्ली को पांच क्षेत्रों में बांटा जा सकता है- पूर्वी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली, उत्तारी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली और मध्य दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के अंतर्गत 16 सीटें आती हैं। इनमें से 10 सीटों पर कांग्रेस और 5 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की है, जबकि एक सीट बसपा को मिली है। गौरतलब है कि भाजपा ने तीन सीटों पर बहुत कम अंतर से जीत दर्ज की है। अब तक स्वच्छ छवि रखने वाले भाजपा के प्रदेश अधयक्ष डॉ. हर्षवर्धन को कांग्रेस की प्रत्याशी दीपिका खुल्लर ने अच्छी टक्कर दी और उन्हें बमुश्किल सिर्फ 3204 वोटों से ही जीत हासिल हुई। पूर्वी दिल्ली में कांग्रेस ने लक्ष्मीनगर, गांधीनगर, विश्वास नगर, पटपड़गंज, कोंडली, शहादरा, सीलमपुर, रोहतास नगर, सीमापुरी और मुस्तफाबाद सीट पर जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा को कृष्णानगर, करावल नगर, घोंडा, बाबरपुर और त्रिलोकपुरी की सीट पर जीत हासिल हुई है। इस क्षेत्र में गोकुलपुरी की सीट बसपा को मिली है। यहां से बसपा के सुरेंद्र कुमार ने विजय पाई है। पटपड़गंज सीट की काफी चर्चा थी, क्योंकि यहां से दो युवा नेता पहली बार मैदान-ए-जंग में थे। ये दोनों पूर्व में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के नेता रह चुके हैं। यहां से नकुल भारद्वाज से कई चक्रों तक पीछे चल रहे कांग्रेस के अनिल चौधरी आखिरकार जीत गए। इन दोनों के बीच जीत का अंतर बहुत ही कम रहा। सीमापुरी से वीर सिंह घिंगान ने 19268 वोटों से जीत हासिल की है। इनके अलावा कांग्रेस के ए.के. वालिया, अरविंद सिंह लवली, मतीन अहमद, नसीब सिंह और रामबाबू शर्मा बड़े अंतर से विजयी हुए, जबकि भाजपा के मोहन सिंह बिष्ट ने 25135 वोटों से जीत दर्ज की।
पश्चिम दिल्ली के अंतर्गत 16 सीटें हैं। इनमें से 15 के परिणाम घोषित हुए हैं। यहां आठ सीटें कांग्रेस, 6 सीटें भाजपा और 1 सीट इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के खाते में गई हैं। यहां से जीतने वालों में दिल्ली के शहरी विकास मंत्री राजकुमार चौहान सहित मुकेश शर्मा, महाबल मिश्रा, सुमेश शौकीन, बिजेंदर सिंह, मालाराम गंगवाल, दयानंद चंदेला और नंद किशोर जैसे कांग्रेस प्रत्याशी शामिल हैं। भाजपा के प्रो. जगदीश मुखी, जनकपुरी से तथा हरिनगर से हरशरण सिंह बल्ली लगातार चौथी बार विजयी हुए हैं। बाहरी दिल्ली में मटियाला, बिजवासन, पालम और दिल्ली कैंट की सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की है। दूसरी तरफ, भाजपा का इनेलो के साथ चुनावी तालमेल न होने के कारण नजफगढ़ की सीट गंवानी पड़ी है। यहां से इनेलो के भरत सिंह ने जीत दर्ज की।
उत्तारी दिल्ली की 16 सीटों में से नौ सीट पर कांग्रेस और सात सीटों पर भाजपा के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। नरेला, बादली, बवाना, सुल्तानपुर माजरा, मॉडल टाउन, तिमारपुर, आदर्श नगर, त्रिनगर और वजीरपुर की सीट कांग्रेस के खाते में गई है, जबकि रिठाला, किराड़ी, रोहिणी, बुराड़ी, शालीमार बाग और शकूरबस्ती की सीट भाजपा के पाले में गई। रोहिणी, भाजपा का गढ़ माना जाता है। वहां से भाजपा के जय भगवान अग्रवाल ने चौथी बार जीत दर्ज की है। वहीं सुल्तानपुर माजरा से कांग्रेस के जयकिशन ने दूसरी बार जीत दर्ज की। कांग्रेस के धाकड़ नेता एस.सी. वत्स शकूरबस्ती से चुनाव हार गए हैं तो मॉडल टाउन से कुंवर करण सिंह ने जीत दर्ज की है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मांगेराम गर्ग को इस बार वजीरपुर से हार का स्वाद चखना पड़ा है। आदर्श नगर से दिल्ली सरकार के मंत्री मंगतराम सिंघल चुनाव जीत गए, लेकिन इस बार जीत का अंतर बहुत कम रहा।
दक्षिणी दिल्ली में भी कांग्रेस का दबदबा कायम रहा। यहां की 14 सीटों में से 10 सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा किया, जबकि तीन सीटों पर भाजपा और एक सीट पर बसपा ने जीत दर्ज की। जंगपुरा, कस्तूरबा नगर, ओखला, मालवीय नगर, आरके पुरम, कालकाजी, देवली, अंबेडकर नगर, छतरपुर और महरौली सीट कांग्रेस के खाते में गई। वहीं ग्रेटर कैलाश, तुगलकाबाद और संगम विहार की सीट पर भाजपा उम्मीदवार विजयी रहे हैं। बदरपुर सीट पर बसपा के उम्मीदवार राम सिंह नेताजी ने जीत दर्ज की है। जंगपुरा सीट से तरविंदर सिंह मारवाह ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की, तो लगातार तीन बार चुनाव जीतने वाले भाजपा के सुशील चौधरी को कस्तूरबा नगर से हार का स्वाद चखना पड़ा है। इन्हें युवा नेता नीरज बसोया ने हराया है। भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार विजय कुमार मल्होत्रा ने ग्रेटर कैलाश से जीत दर्ज की है। इनके अलावा भाजपा के एचसीएल गुप्ता और रमेश बिधूड़ी ने भी संगम विहार और तुगलकाबाद से जीत दर्ज की है।
मध्य दिल्ली के अंतर्गत 8 निर्वाचन क्षेत्र हैं, जिनमें से 5 सीटों पर कांग्रेस, दो सीटों पर भाजपा और एक सीट पर लोक जनशक्ति पार्टी के उम्मीदवार विजयी रहे हैं। सदर बाजार, चांदनी चौक, बल्लीमारान, पटेल नगर, नई दिल्ली की सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी विजयी रहे तो करोलबाग और मोती नगर सीट पर भाजपा प्रत्याशी। और मटिया महल की सीट लोक जनशक्ति पार्टी के खाते में गई है। गौरतलब है कि इस सीट से शोएब इकबाल ने चौथी बार जीत दर्ज की है। मध्य दिल्ली इस खयाल से और भी महत्तवपूर्ण है, क्योंकि इस क्षेत्र से दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित खड़ी थीं और उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी विजय जौली को हराया है। इनके अलावा दिल्ली के परिवहन मंत्री हारून यूसुफ ने बल्लीमारान सीट से भाजपा के प्रत्याशी मोतीलाल सोढ़ी को धूल चटाई है। वहीं चांदनी चौक सीट से कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी प्रहलाद सिंह साहनी ने तीसरी बार विजय दर्ज की है। दिल्ली
कुल सीटें-70
पार्टी 2003 2008
कांग्रेस 47 43 (-4)
भाजपा 20 23 (+3)
बसपा 0 2
अन्य 3 2


चौथी बार जीतने वाले विधायक
डॉ।हर्षवर्धन, डॉ.जगदीश मुखी, हरशरण सिंह बल्ली, जयभगवान अग्रवाल, राजकुमार चौहान, मुकेश शर्मा, चौ. प्रेम सिंह, ए.के. वालिया, मतीन अहमद, हारून यूसुफ, शोएब इकबाल, साहिब सिंह चौहान।


तीसरी बार जीतने वाले विधायक
शीला दीक्षित, तरविंदर सिंह मारवाह, महाबल मिश्र, परवेज हाशमी, सुभाष चोपड़ा, डॉ. योगानंद शास्त्री, मालाराम गंगवाल, अमरीश गौतम, अरविंदर सिंह लवली, नसीब सिंह, नरेंद्रनाथ, वीर सिंह झिंगान, प्रहलाद सिंह साहनी, कंवर करण सिंह, राजेश जैन।

सबसे ज्यादा अंतर से जीते
अरविंदर सिंह लवली (गांधी नगर) - 31925 वोट
राजकुमार चौहान (मंगोलपुरी) - 29863 वोट
हरशरण सिंह बल्ली (हरिनगर) - 28758 वोट
कुलवंत राणा (नरेला) - 26346 वोट
मतीन अहमद (सीलमपुर) - 26274 वोट
जयभगवान अग्रवाल (रोहिणी) -25774 वोट
ए.के. वालिया (लक्ष्मीनगर)- 22397 वोट

सबसे कम अंतर से जीते
दयानंद चंदेला (राजौरी गार्डन) - 46 वोट
परवेज हाशमी (ओखला) - 541 वोट
साहिब सिंह चौहान (घाेंडा) - 580 वोट
सुनील कुमार वैद्य (त्रिलोकपुरी) - 654 वोट
अनिल चौधरी (पटपड़गंज) - 663 वोट
जसवंत राणा (नरेला) - 835 वोट
नंद किशोर (विकासपुरी) - 943 वोट

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